समुद्र शास्त्र के अनुसार लोगो की हंसी भी उनका व्यवहार बताती है जानिए कैसे!!

हंसना मनुष्य के प्रमुख गुणों में से एक है जिसे सहजता से प्राप्त तो किया जा सकता है पर आत्मसात् नहीं किया जा सकता है. किसी दूसरे व्यक्ति के दुःख और दर्द में हृदय से स्वयं को शामिल करना बहुत ही कठिन है. स्वार्थ व ईर्ष्यापूर्ण जीवन आज किसी की सफलता और ख़ुशी में हृदय से मुस्कुराना भी बहुत कठिन काम है. कभी कभी हम अपने जानने वालो की उन्नति में भी प्रसन्न नही हो पाते है. कभी कभी ऐसा भी होता है की बाहर से तो मुस्कराते है किन्तु अंतर्मन से नही हंसते या खुश होते है.

यह किसी भी मनुष्य का स्वभाविक गुण है. जिससे वह स्वयं की खुशी को जाहिर करता है. कहा जाता है की हंसने से शरीर में खून बढता है और साथ ही हमारा यौवन खिलता है और उम्र लम्बी होती है. हर मनुष्य किसी दुसरे मनुष्य से भिन्न तरह से हंसता है. कई मनुष्य ऐसे होते है जो जोर से खिलखिलाकर हंसते है और कई सारे ऐसे भी होते है जो मंद-मंद मुस्कुराते है. समुद्र शास्त्र के अनुसार, यदि इस बात पर गौर किया जाता है की वह किस प्रकार से हंसता है तो उसके स्वाभाव से जुडी कई सारी बाते जानी जा सकती है. समुद्र शास्त्र के अनुसार आज हम आपको बता रहे हैं मनुष्य की हंसी के अनुसार उसका व्यवहार कैसा हो सकता है.

आइये जानते है मनुष्य के हंसने के तरीके से जुडी कुछ बाते-

1. ऐसे लोग जो खिलखिलाकर हंसते है वे सहनशील, दयालु और सभी का भला सोचने वाले होते है. ऐसे लोग पढाई-लिखाई में भी आगे होते हैं. जो लोग खिलखिलाकर हंसते है वे कभी किसी को धोखा नही देते है. और इन्हें अच्छा प्रेमी भी माना जाता है.

2. कुछ लोग ऐसे होते है जो ठहाका मारकर और ऊंचे स्वर में हंसते है ऐसे लोगो के बारे में कहा जाता है की वे अपने जीवन में हमेशा सफल होते हैं. कभी कभी ऐसा भी देखा जाता है की कोई ऐसी हंसी के साथ अपना चेहरा भी व्यंगपूर्ण कर लेता है. तो उसमे अहंकार की भावना भी होती है.

3. ऐसे लोग जो हमेशा रुक-रुक कर हंसते है या फिर किसी भी विषय पर उन्हें कुछ देर बाद हंसना आता है. उनके बारे में कहा जाता है ऐसे लोगो की मानसिक शक्ति कमजोर होती है. इस प्रकार के लोग किसी भी काम में सफल नही हो पाते है.
4. कुछ लोगो के बारे में कहा जाता है की वे हंसते नही है बल्कि धीरे से मुस्कराते है अर्थात ऐसे लोगो की मुस्कान शांत होती है. ये व्यक्ति अपने मन की प्रसन्नता को ही व्यक्त करते है. ये लोग हमेशा गंभीर, धैर्यवान, शांतिप्रिय, विश्वासी, ज्ञानी एवं स्थिर प्रवृति के मने जाते है.
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5. ऐसे लोग जो घोड़े की तरह हिनहिना कर हंसते है. ऐसे लोग धूर्त, अहंकारी, कपटी तथा निक्कमे प्रवृति के होते है. इस प्रकार के लोग अविश्वासी होते है तथा दुसरो का फायदा उठाने में माहिर होते हैं.
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