भारत का स्वदेशी की ओर एक और बड़ा कदम, अब वातानुकूलित सूत का जैकेट आएगा बाज़ार में

भारत में इतनी क्षमताएं तो है कि वह पुरे विश्व को चला सके, भारत ने शून्य की खोज की और भारत ने ही पहिये(व्हील) की खोज की और इन दो खोजों से ही पूरी तकनीकी विकसित हुई है.

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आज हम बात कर रहे है बिहार जिले के खनवां गाँव की जिस गाँव ने कपडा उद्योग के क्षेत्र में एक अहम् व बड़ा कदम उठाया है. अब इस गाँव के उद्योग मात्र कपडा ही नहीं बल्कि एसी(वातानुकूलित) जैकेट भी तैयार कर रहे है. इस तरह का काम करने वाला यह गाँव देश का पहला गांव बन गया है, जहां ऐसी जैकेट बनाया जा रहा है. नवादा के सांसद सह केंद्रीय लघु, मध्यम व कुटीर उद्योग राज्यमंत्री गिरिराज सिंह ने खनवां गाँव स्थित भारतीय हरित खादी ग्रामोदय संस्थान के प्रांगण में यहां की महिलाओं द्वारा सोलर चरखे से तैयार सूत से बने एसी जैकेट को प्रदर्शित किया. इस जैकेट में अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है.

इस जैकेट में क्लाइमेट गियर (रिमोट) है. इसमें नीला व लाल बटन है, जिससे 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तक तापमान बढ़ाया व घटाया जा सकता है. रिमोट दबाने के दो मिनट बाद से ही जैकेट शरीर के तापमान को नियंत्रित कर लेगा. इसमें छोटे-छोटे पंखे लगे हुए हैं, जिनसे गरम व ठंडी हवाएं निकलेंगी.

इस जैकेट में स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इसमें लगे क्लाइमेट गियर का ईजाद MIT के छात्र क्रांति ने किया है. इसकी कीमत कितनी होगी इस सवाल पर सस्पेंस बना हुआ है.

गिरिराज सिंह ने कहा है कि एक जैकेट को बनाने में 20 से 25 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन इसकी कीमत नीति आयोग तय करेगा. हालांकि, यह आम लोगों तक कब पहुंचेगा इस बारे में कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई है.

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