जानिए क्यों एक ही गोत्र में विवाह नहीं करना चाहिए

आप सभी विवाह के बारे में बहुत कुछ जानते होंगे. यह भी जानते होंगे की विवाह के पूर्व संबंध तय करते समय किन बातों का ध्यान रखा जाता है. विवाह से संबंधी चर्चा के समय आपने यह तो सुना ही होगा कि इनका अथवा अमुक विवाह नहीं हो पाया, क्योंकि लड़का और लड़की एक ही गोत्र के थे. कुछ लोग इस बात को सिर्फ एक रूढ़ि मानते हैं किन्तु कुछ लोग इसका बढ़ा-चढ़ाकर प्रचार करते हैं.
ek gotra mai vivah varjit
सगोत्र (एक ही गोत्र) विवाह निषेध यह चिकित्सा विज्ञान की ‘सेपरेशन ऑफ जींस’ की मान्यता पर आधारित है. एक ही गोत्र में विवाह करने पर कई वैज्ञानिक अनुसंधानों ने रिसर्च किया है, उसके बाद यह निष्कर्ष निकाला गया है कि यदि एक ही रक्त संबंधियों में विवाह होता है तो इससे उनके गुणसूत्र समान होने की अधिक संभावना है.
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ऐसा माना जाता है की एक समान जींस के द्वारा उत्पन्न होने वाली संतान को कई प्रकार की गंभीर बीमारियों जैसे हीमोफीलिया, रंग-अंधत्व आदि से ग्रसित होने की आशंका बढ़ जाती है.
इसी कारण हमारे धर्म शास्त्रों में सगोत्र विवाह को निषेध किया गया है. किंतु ऐसा भी सामने आया है की कई समाजों में निकट रक्त संबंधियों से विवाह करने के प्रचलन होने के बावजूद उन दंपतियों से पैदा हुई संतानों में किसी भी प्रकार की गंभीर बीमारी नहीं पाई गई.
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इस प्रकार के सभी नियमों को उनकी वास्तविकता के आधार पर देखने की आवश्यकता है. सगोत्र का यह नियम यदि वैज्ञानिक अनुसंधानों पर आधारित होकर केवल रक्त संबंधियों तक ही सीमित रहे तो बेहतर है. किंतु कई बार ऐसा भी देखने में आता है कि सगोत्र विवाह निषेध के नाम पर कुछ लोग ऐसे रिश्तों को भी नकार देते है जिनमें पीढ़ी-दर-पीढ़ी में कोई रक्त संबंध नहीं रहा है.

अत: हमें वर्तमान चिकित्सा विज्ञान वाले युग में इस प्रकार के सभी नियमों के पीछे छिपे उद्देश्यों को उसके वास्तविक रूप में देखना व समझना चाहिए.

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