भीम पुत्र घटोत्कच के जीवन के बारे में कुछ ऐसे तथ्य जिन्हें जानकर आप भी चौक जायेंगे..

ऐसे हुआ घटोत्कच का जन्म

जब सभी पांडव लाक्षागृह की आग से बच निकलने के बाद अपनी माता कुंती के साथ छिपते हुए वन में चले गए. उस वन में हिडिंबासुर नाम का राक्षस अपनी बहन हिडिंबा के साथ रहता था. हिडिंबा ने जब भीम को देखा तो उसको भीम से प्रेम हो गया. तभी हिडिंबासुर भी वहां आ गया. युद्ध में भीम ने उसका वध कर दिया. कुंती के कहने पर भीम ने हिडिंबा से विवाह कर लिया. कुछ समय बाद भीम और हिंडिबा के मिलन से एक महापराक्रमी बालक पैदा हुआ. वह क्षणभर में ही बड़े-बड़े राक्षसों से भी बढ़ गया और तुरंत ही जवान हो गया. घटोत्कच के सिर पर बाल नहीं थे. घटोत्कच का नाम सिर पर बाल नही होने के कारण घटोत्कच पड़ा था. भीम और हिंडिबा ने उसके घट अर्थात सिर को उत्कच यानी केशहीन देखकर उसका नाम घटोत्कच रख दिया.

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क्यों लंका गया था घटोत्कच?

महाभारत के दिग्विजय पर्व के अनुसार, जब राजा युधिष्ठिर ने राजसूय यज्ञ का आयोजन किया तो भीम, अर्जुन, नकुल व सहदेव को अलग-अलग दिशाओं में निवास कर रहे राजाओं से कर लेने के लिए भेजा. कुछ राजाओं ने आसानी से कर दे दिया तो कुछ युद्ध के बाद कर देने के लिए राजी हुए. इसी क्रम में सहदेव ने घटोत्कच को लंका भेजा और राजा विभीषण से कर लेकर आने को कहा. घटोत्कच अपनी मायावी शक्ति से तुरंत लंका पहुंच गया. वहां जाकर घटोत्कच ने राजा विभीषण को अपना परिचय दिया और आने का कारण बताया. घटोत्कच की बात सुनकर विभीषण प्रसन्न हुए और उन्होंने कर के रूप में बहुत धन देकर उसे लंका से विदा किया.

घटोत्कच ने दुर्योधन से युद्ध भी किया था

जब पांडव व कौरवों की सेना के बीच कुरुक्षेत्र के मैदान में युद्ध छिड़ा हुआ था, उस समय घटोत्कच और दुर्योधन के बीच भी भयानक युद्ध हुआ था. जब भीष्म पितामाह को पता चला कि दुर्योधन और घटोत्कच में युद्ध हो रहा है तो उन्होंने द्रोणाचार्य को कहा कि- घटोत्कच को युद्ध में कोई भी पराजित नहीं कर सकता. इसलिए आप उसकी सहायता के लिए जाईए. भीष्म के कहने पर द्रोणाचार्य, जयद्रथ, कृपाचार्य, अश्वत्थामा, विकर्ण व अनेक महारथी दुर्योधन की सहायता के लिए गए, लेकिन घटोत्कच ने उन्हें भी अपने पराक्रम से घायल कर दिया. घटोत्कच ने अपनी मायावी शक्ति से ऐसा भयानक दृश्य उत्पन्न किया कि उसे देखकर कौरवों की सेना भाग गई थी.

घटोत्कच ने किया था अलम्बुष का वध

युद्ध के दौरान घटोत्कच और कौरवों की ओर से युद्ध कर रहे राक्षस अलम्बुष में भी भयानक युद्ध हुआ था. अलम्बुष भी मायावी विद्याए का ज्ञाता था. घटोत्कच युद्ध में जो भी माया दिखाता, उसे अलम्बुष अपनी माया से नष्ट कर देता था. अलम्बुष ने घटोत्कच को अपने तीरों से घायल कर दिया. गुस्से में आकर घटोत्कच ने उसका वध करने का निर्णय लिया. घटोत्कच ने अपने रथ से अलम्बुष के रथ पर कूद कर उसे पकड़ लिया और उठाकर जमीन पर इस प्रकार पटका कि उसके प्राण निकल गए. यह देख पांडवों की सेना में हर्ष छा गया और वे प्रसन्न होकर अपने अस्त्र-शस्त्र लहराने लगे.

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