क्यों होता है मुंडन संस्कार, कारण जानकर आप भी हैरान रह जायेंगे

नई दिल्ली :हमारे संसार में फैले सभी धर्मों की अपनी कुछ न कुछ मान्यताए और रीति रिवाज होते है। जिसको उस धर्म को मानने वाले लोग अपनी आस्थानुसार निभाते है। हिन्दु धर्म और सनातन धर्म एक है इसमें धर्म में 16 प्रकार के संस्कार बताये गये है। जिन्हें हर व्यक्ति को उसके समायानुसार निभाना होता है। आज के इस आधुनिक जीवनशैली में सभी संसकारों को निभाना कठिन हो रहा है।लेकिन कुछ संस्कार ऐसे भी हैं जिन्हें लोग आज भी निभा रहें हैं । उन्ही में से एक संस्कार है मुंडन संस्कार जिसे हिन्दू धर्म में अभी भी प्रमुखता के साथ निभाया जाता है। जन्म के पश्चात मुंडन संस्कार हिन्दू धर्म का एक प्रमुख संस्कार है। इस संस्कार को निभाने के पीछे धार्मिक मान्यता के अलावा वैज्ञानिक कारण भी है। आज हम आपको इस संस्कार के धार्मिक और वैज्ञानिक कारण बताने जा रहें हैं.
moondan sanskar
मुंडन संस्कार कराने के पीछे जो मुख्य कारण बताया जाता है वो सफाई को लेकर है। जब बच्चा मॉ के गर्भ में होता है तब बच्चे के सिर पर जो बाल होते है उनमें किटाणु और बैक्टिरिया लगे होते है। ये किटाणु और बैक्टिरिया नहाने धोने से भी साफ नहीं होते है। इसलिये इन बैक्टिरिया को दूर करने के लिये बच्चों का मुंडन कराया जाता है जिसमें उनके सर के सारे बाल साफ कर दिये जाते है। मुंडन करवाने से बच्चों के शरीर का तापमान सामान्य स्तर पर आ जाता है। दिमाग और शरीर भी स्वस्थ रहता है। बच्चों के मुंडन करवाने से दांत निकलने वाले समय दर्द से राहत मिलती है और तालू का कांपना भी बंद हो जाता है। मुंडन कराने के बाद ही बच्चों के बाल सही तरिके से आ पाते है।
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शास्त्रों धर्मग्रंथो और वेदों में भी इन 16 संस्कारों के बारे में बताया गया है इनमें से यर्जुवेदमें में उल्लेख किया जिसमें मुंडन संस्कार का वर्णन करते हुये बताया गया है कि बच्चों के बालो का मुंडन कराने से उनका तेज बढता है और शरीर आरोग्य रहता है। पुरातन मान्यताओं के अनुसार ही बच्चों की बुद्धि का विकास करने और गर्भावस्था के समय होने वाली अशुद्धियों को दूर करने के लिये बच्चों का मुंडन किया जाता है। लोग ये भी मानते है कि सर के बाल हट जाने से सिर और शरीर में सीधा धुप जाती है जिससे बच्चों को विटामीन डी की कमी पूरी होती है। धुप से शरीर की कोशिकाएॅ जाग्रत होती है जिससे रक्त का संचरण भी सुचारू रूप से होने लगता है।

मुंडन संस्कार वैसे तो कहीं भी कर लेते है लेकिन प्रमुख तौर पर इसे किसी तीर्थ स्थल पर ही करवाने की रिवाज है। इसका लाभ बच्चों को वहां की सकारात्मक उर्जा के रूप में मिलता है और ऐसा माना जाता है कि इससे बच्चों मे सुविचारों की उत्पत्ति होती है। भारत के प्रमुख प्रमुख मंदिरो में लोग मुंडन करवाने के लिये जाते है। जन्म के प्रथम वर्ष, तीसरे वर्ष, पॉचवे वर्ष और सातवें वर्ष में मुंडन करवाने की परपंरा है।

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