मुगलों की जिद की वजह से हुई थी भारत के महान संगीतज्ञ तानसेन की मृत्यु

संगीत सम्राट तानसेन को कौन नहीं जानता. संगीत सम्राट तानसेन की नगरी ग्वालियर के लिए कहावत प्रसिद्ध है कि यहाँ बच्चे रोते हैं, तो सुर में और पत्थर लुढ़कते हैं तो ताल में. इस नगरी ने पुरातन काल से आज तक एक से बढ़कर एक संगीत प्रतिभायें संगीत संसार को दी हैं और संगीत सूर्य तानसेन इनमें सर्वोपारि हैं. तानसेन मुग़ल शासक अकबर के राज्य के नौ रत्नों में से एक थे. तानसेन की महानता के बारे में इसी से पता लगाया जा सकता है कि जब वह राग छेड़ते थे तो दीपक अपने आप जलनें लगते थे. अभी आपको यह सुनकर भले ही मज़ाक लगे, लेकिन जब इतिहास के पन्नों को खंगाला जाये तो सच्चाई सामने आती है.

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ज्यादातर लोग तानसेन को उनके बेहतरीन कला की वजह से जानते हैं. जबकि इसके अलावा भी उनके जीवन से जुडी कई महत्वपूर्ण बातें हैं, जो शायद ही कोई जानता होगा. तानसेन की मृत्यु कब और कैसे हुई यह एक राज बना हुआ है. आप यक़ीनन तानसेन की मृत्यु का सच जानकर हैरान हो जायेंगे.
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तानसेन की मृत्यु कैसे हुई, इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण और दिलचस्प यह है कि तानसेन की मृत्यु किसकी वजह से हुई. जी हाँ तानसेन की मौत के पीछे किस का हाथ था. जैसा कि सभी लोगों को पता है मुग़ल शासक अकबर बहुत ही प्रभावशाली व्यक्ति था. उसके दरबार में नौ रत्न थे, जिनमें से एक तानसेन भी थे. तानसेन अकबर के चहेते गायक थे, इस वजह से वो उनकी कोई बात नहीं टालते थे.

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तानसेन की यह बात दरबार के अन्य लोगों को पसंद नहीं थी. इसलिए कुछ लोगों ने मिलकर तानसेन को मारने की योजना बनाई. सभी लोगों ने मिलकर अकबर से कहा कि वो तानसेन को राग दीपक गानें के लिए कहें. अकबर ने लोगों की बातों को नजरंदाज कर दिया. लेकिन वो ज्यादा दिन तक टाल नहीं पाए. एक दिन उन्होंने तानसेन के सामने जिद की कि वह राग दीपक गायें. तानसेन ने भी इनकार करने की कोशिश की, लेकिन अकबर के आगे उनकी एक ना चली. तानसेन ने यह पहले ही बता दिया कि राग दीपक गाने से उनका शरीर भी जलने लगता है, लेकिन फिर भी अकबर नहीं माना.

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चूँकि अकबर राजा था, इसलिए उसनें तानसेन को आदेश दिया कि वह राग दीपक गाये. इसके बाद तानसेन ने राग दीपक गाना शुरू किया, जिससे दीपक जल उठे. लेकिन आस-पास का माहौल भी गर्मानें लगा. कुछ ही समय बाद दरबार में आग लग गयी और सब खुद को बचानें के लिए इधर-उधर भागनें लगे. राग दीपक गानें की वजह से तानसेन के शरीर से भी ताप निकलने लगा.

उस समय दरबार में तानसेन की बेटियाँ भी मौजूद थी, जिन्होनें मौके की नजाकत को देखते हुए राग मल्हार गाकर माहौल को ठंडा किया और उनकी जान बचा ली. उस समय उनकी आयु 80 वर्ष थी, जिस वजह से वह इससे पूरी तरह उबर नहीं पाए. उस समय चढ़ा हुआ ताप 3 साल बाद फिर उभर आया. 1585 में इसी भयानक ज्वर की वजह से उनकी जान चली गयी. हालाँकि यह जानकारी के पर्याप्त साक्ष्य नहीं है. परन्तु कुछ जानकारों के द्वारा यही जानकारी प्राप्त हुई है.

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