विदुर नीति: ऐसे लोगों को नही होती है अच्छे-बुरे की पहचान, जानें इन 10 लोगों के बारे में

महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत ग्रंथ विश्व विख्यात है. इसकी कथा बड़ी रोचक व विस्तृत भी है. शास्त्रों में महाभारत को पांचवां वेद कहा गया है. महर्षि वेदव्यास का इस ग्रंथ के बारे में स्वयं का कथन है – यन्नेहास्ति न कुत्रचित्. अर्थात जिस विषय की चर्चा इस ग्रंथ में नहीं है, उसकी चर्चा कहीं भी उपलब्ध नहीं है. इस ग्रंथ में कुल एक लाख श्लोक हैं, इसलिए इसे शतसाहस्त्री संहिता भी कहते हैं. महाभारत के उद्योग पर्व में युद्ध से पहले महात्मा विदुर, राजा धृतराष्ट्र को जीवन-प्रबंध से जुड़ी अनेक बातें बताते हैं. इसे विदुर नीति कहते हैं. विदुर नीति के अनुसार कुछ लोगों को अच्छे-बुरे का ज्ञान नहीं रहता, इनसे बचने की 10 बातें जो आपको जानना बहुत ही जरुरी है:
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1. नशे में धुत्त व्यक्ति
जिस भी व्यक्ति ने नशा किया हुआ हो, उससे दूर रहने में ही हमारी भलाई है. नशे करने वाले व्यक्ति को अच्छे बुरे का ज्ञान नही होता है, उसे पता नही रहता है की वह क्या कर रहा है ऐसे में वह कई बार ऐसे गलत कार्य भी करता है, जो उसे नही करना चाहिए. विदूर निति के अनुशार नशे किये गए व्यक्ति के द्वारा किये गए गलत कार्य का परिणाम उसके साथ रहने वाले व्यक्ति को भी मिलता है, इसलिए हमेशा ऐसे व्यक्ति से दूर रहने में ही सार्थकता है अन्यथा किसी भी समस्या का सामना करना पढ़ सकता है.

2. असावधान(लापरवाह) मनुष्य
विदुर नीति के अनुसार, लापरवाह व्यक्ति को भी अच्छे-बुरे का ध्यान नहीं रहता है, इसलिए उसके साथ भी नहीं रहना चाहिए. उसकी लापरवाही के कारण हम भी परेशानी में आ सकते है. जैसे किसी व्यक्ति का पुराने समय से विवाद चल रहा हो, इसके बाद भी यदि वह सावधान नहीं रहता है, तो उसका मौका उठाकर दुश्मन उस पर कभी भी वार कर सकते हैं. असावधान रहने पर उसे तो नुकसान होगा ही साथ ही साथ उसके साथ रहने वाले व्यक्ति को भी शारीरिक चोट पहुँच सकती है. वाहन चलाते समय थोड़ी-सी लापरवाही की वजह से उसकी व उसके साथ वाले व्यक्ति की जान जा सकती है. इसलिए जो व्यक्ति असावधान यानी लापरवाह हो, उसके साथ न ही रहें तो बेहतर रहेगा.

3. पागल इंसान
जिस व्यक्ति का मानसिक संतुलन बिगड़ गया हो, उसे सही-गलत या अच्छे-बुरे का ज्ञान नहीं होता. वह तो बिना वजह कुछ भी करता रहता है. असंतुलित व्यक्ति ऐसे में कई बार ऐसे काम कर देते है, जो उसे नहीं करना चाहिए. पागल व्यक्ति बिना कारण किसी पर वार कर सकता है या सम्मानजनक व्यक्ति को अपमानित कर सकता है. ऐसी स्थिति में उसे लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ता है. पागल व्यक्ति को तो लोगों की मार का कोई फर्क भी नहीं पड़ता है, लेकिन कई बार पागल व्यक्ति के साथ रहने वालों को बिना किसी कारण ही लोगों के गुस्से का शिकार होना पड़ता है. इसलिए जिस व्यक्ति का मानसिक संतुलन ठीक नहीं हो, उसके साथ भी नहीं रहना चाहिए.

4. थका हुआ व्यक्ति
जिस व्यक्ति ने पुरे दिन कमरतोड़ परिश्रम किया हो और वह बहुत बुरी तरीके से थक चूका हो ऐसे व्यक्ति को भी उसकी बेचैनी की वजह से अच्छे-बुरे की समझ नही रहती है. थका हुआ व्यक्ति किसी से विवाद नहीं करता, वह तो बस आराम करना चाहता है. अगर उसके आराम में उसे बाधा आती है तो वह सही-गलत का निर्णय किए बिना ही कुछ ऐसा कर सकता है, जो उसे नहीं करना चाहिए. इस स्थिति में उसे तो नुकसान उठाना ही पड़ेगा, लेकिन उसके साथ यदि कोई है तो वह भी परेशानी में फंस सकता है. इसलिए ऐसे व्यक्ति से दूर रहने में ही भलाई है.

5. क्रोधी व्यक्ति
जिस व्यक्ति को छोटी-छोटी बातों पर बहुत क्रोध आता हो, उसे भी धर्म-अधर्म का ज्ञान नहीं रहता, इसलिए ऐसे लोगों से भी दूर ही रहना चाहिए. जिस व्यक्ति का स्वभाव गुस्से वाला हो, वह छोटी सी बात पर क्रोध करता हो वह किसी भी व्यक्ति पर वार कर सकता है या ऐसा कुछ कर सकता है जिसे करने के बाद उसे उसके किये पर पछताना पड़े. ऐसे लोग बहुत ही दुःसाहसी होते हैं. क्रोध आने पर ये किसी का भी नुकसान कर बैठते हैं.
हालांकि आगे जाकर इन्हें भी अनेक मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. ऐसे लोगों के साथ रहने वाले लोग भी हमेशा डरे हुए रहते हैं. क्योंकि क्रोधी व्यक्ति किसी-की नही सुनता है वह अपनी ही चलाता है क्रोधी व्यक्ति के कारण हम भी मुसीबत में फंस सकते हैं. इसलिए क्रोधी व्यक्ति से दूर ही रहने में भलाई है.

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