करवा चौथ व्रत विधि और कथा | Karva Chauth Vrat Vidhi and Katha in Hindi

करवा चौथ की पूजा, व्रत विधि, कथा और 2018 में तिथि | Karva Chauth Puja Vrat Vidhi, Katha (Kahani), Mahurat Time and Dates in 2018 in Hindi

भारत में करवा चौथ का बहुत महत्त्व है. पूरे भारत वर्ष में करवा चौथ उत्साह के साथ मनाया जाता हैं. भारत में व्रत और त्यौहारों का बड़ा ही महत्व होता हैं. महिलाओं के जीवन में करवा चौथ का बड़ा ही महत्व हैं. करवा चौथ का व्रत सुहागन महिलाएं अपने पति की लम्बी आयु के लिए रखती हैं. कुंवारी लड़कियां अच्छे पति की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं. यह व्रत हर वर्ष कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन रखा जाता हैं.

वर्ष 2018 में करवा चौथ दिनाँक, मुहूर्त और चंद्रोदय समय (Karva Chauth Mahurat Time and Date)

वर्ष 2018 में करवा चौथ 28 अक्टूबर 2018, रविवार के दिन मनाई जाएँगी.

  • करवा चौथ पूजा मुहूर्त- 17:36 से 18:54
  • चंद्रोदय- 20:00
  • चतुर्थी तिथि आरंभ- 18:37 (27 अक्तूबर)
  • चतुर्थी तिथि समाप्त- 16:54 (28 अक्तूबर)

करवा चौथ व्रत की पूजा विधि (Karva Chauth Puja Vidhi)

  • इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पूर्व स्नान करती हैं.
  • करवा चौथ के दिन महिलाएँ निर्जला उपवास रखती हैं.
  • संध्या को पूजन के स्थान पर या दीवार पर गेरू से फलक बनाकर चावल को पीसे. इस विधि को करवा धरना के नाम से जाना जाता हैं.
  • उसके बाद दीवार पर कागज पर भगवान शिव और कार्तिकेय की प्रतिमा बनाई जाती हैं.
  • विधिवत पूजन कर करवा चौथ की कथा का वाचन करना चाहिए.
  • पूजन के बाद चन्द्रमा को अर्ध्य देने की परम्परा हैं. चंद्रमा को अर्ध्य छलिनी के ओट से दिया जाता हैं और करवे के पानी को पिया जाता हैं. इसके बाद पति से आशीर्वाद लेकर महिलाएँ अपना उपवास खोलती हैं.

Karva Chauth Vrat Vidhi and Katha in Hindi

इसे भी पढ़ें: +30 Karwa Chauth Shayari, Quotes, Status for Husband and Wife in Hindi

करवा चौथ व्रत कहानी या कथा (Karva Chauth Vrat Kahani)

करवा चौथ के दिन पूजन के समय करवा चौथ की कथा महिलाएँ पढ़ती हैं.

इन्द्र विवाह प्रस्थपुर में एक वेदशर्मा नाम का ब्राम्हण रहता था. ब्राह्मण वेदशर्मा का विवाह लीलावती से हुआ था. जिससे उन्हें आठ संतान थी जिसमे सात गुणवान पुत्र और एक सुंदर पुत्री थी. उस पुत्री का नाम वीरवती था. सात भाइयों में सबसे छोटी होने कारण अपने माता-पिता के साथ अपने भाइयों के लिए भी अति प्रिय थी.
वीरवती का विवाह एक योग्य ब्राह्मण से हुआ था. शादी के बाद जब वीरवती अपने भाइयों के घर पर आई थी. जब कार्तिक माह की चौथ के लिए वीरवती ने अपनी भाभियों के साथ पति की दीर्घ आयु के लिए करवा चौथ का व्रत का रखा था. व्रत रखने के कारण वीरवती का स्वास्थ्य बिगड़ गया था. अपनी बहन की बिगडती हालत को देख सभी भाइयों ने एक योजना बनाई जिससे उनकी बहन चंद्रमा को अर्ध्यत देकर व्रत खोल सके.

योजना अनुसार एक भाई कुछ दूर वाट के वृक्ष पर दिया लेकर चढ़ गया और भाइयों ने अपनी बहन से कहा की चंद्रमा का उदय हो गया हैं. अपने भाइयों की बातों का विश्वास कर वृक्ष पर छलनी के पीछे से चंद्रमा को अर्ध्य दिया अपना उपवास खोल लिया. जब वीरवती ने भोजन शुरू किया तब ससुराल से एक अशुभ निमंत्रण आया कि उसके पति की मृत्यु हो चुकी हैं. इस खबर को सुन वीरवती रोने लगी और व्रत के दौरान अपनी किसी चूक के लिए स्वयं को दोषी ठहराने लगी. उसके दुखी मन को देख देवराज इंद्र की पत्नी इन्द्राणी वहां प्रकट हुई.

वीरवती ने देवी इन्द्राणी से अपने पति की मृत्यु का कारण पुछा और अपने पति को पुनर्जीवित करने के लिए प्रार्थना करने लगी. देवी इन्द्राणी ने वीरवती से कहा कि तुमने चंद्रमा को अर्ध्य दिए बिना ही अपना व्रत तोड़ लिया था. जिसके कारण तुम्हारे पति की मृत्यु हो गई. देवी ने वीरवती से हर माह की चतुर्थी का व्रत करने के लिए कहा. बाद में वीरवती ने पूरी श्रद्धा से सभी माह के व्रत रखे. अंत में उन सभी व्रतों के पुण्य के रूप में वीरवती का पति पुनः जीवित हो गया.

इसे भी पढ़े :

Ujjawal Dagdhi

Ujjawal Dagdhi

उज्जवल दग्दी दिल से देशी वेबसाइट के मुख्य लेखकों में से एक हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *