क्या है निपाह वायरस? इसके संक्रमण के कारण, लक्षण व बचने के उपाय | Nipah Virus In Hindi

निपाह वायरस क्या है? |What is Nipah Virus?

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (WHO) के अनुसार निपाह वायरस एक नया उभरता हुआ पशुजन्य संक्रमण है, जो इंसानों और जानवरों दोनों में गंभीर बीमारी पैदा करता है. यह वायरस एक प्रकार के चमगादड़ में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है, जिन्हें फ्रूट बेट्स या फ्लाइंग फॉक्स के नाम से भी जाना जाता है. यह वायरस मलेशिया में चमगादड़ के मूत्र और उनके द्वारा आंशिक रूप से खाये गए फलों के नमूनों में पाया गया है.

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दक्षिण एशिया में पाए जाने वाले प्रवासी चमगादड़ों के कारण इन इलाकों में निपाह वायरस का संक्रमण ज्यादा देखा गया है. संक्रमित चमगादड़ों, संक्रमित सूअर या दूसरे प्रभावित इंसानो के प्रत्यक्ष संपर्क में आने से इस वायरस का इंसानों के अंदर संक्रमण होता है. निपाह वायरस के मनुष्यों में संक्रमण के लगभग 582 मामलों में 54 प्रतिशत जानलेवा साबित हुए है.

कैसे सामने आया निपाह वायरस? | How Did Nipah Virus Emerge ?

निपाह वायरस से संक्रमण के मामले मलेशिया, सिंगापोर, बांग्लादेश और भारत में देखे गए है. निपाह वायरस से सबसे ज्यादा मौतें बांग्लादेश में हुई है. बांग्लादेश में इसका प्रकोप आमतौर पर ठण्ड के मौसम में देखा जाता है. इस वायरस की पहचान सबसे पहले 1998 में मलेशिया और सिंगापोर में की गई. उस समय इसे सूअरों में पाया गया और उनके द्वारा यह वायरस मनुष्यों के अंदर फैला. इस वायरस ने 265 इंसानों को अपनी चपेट में ले लिया, जिनमें से 40 प्रतिशत लोगों को गंभीर लक्षणों के कारण इंटेंसिव केयर में रखा गया.

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2001 में निपाह वायरस बांग्लादेश के मेहरपुर और भारत के सिलीगुड़ी जिलों में पाया गया. वर्ष 2003 से 2005 के बीच यह वायरस कई अलग अलग जिलों में देखा गया.

मई 2018 में भारत में केरल के कोझिकोड जिले में इस वायरस का संक्रमण देखा गया. संक्रमण के कारण अब तक लगभग 11 लोगों की मौत हो गई. मृतकों में अधिकतर लोग कोझिकोड और मलप्पुरम जिले के है, जिनमें एक 31 वर्षीय नर्स भी शामिल है, जो वायरस से संक्रमित मरीजों का इलाज कर रही थी. अब तक लगभग 8 लोगों को पृथक रखा गया है, जो बीमार लोगों के संपर्क में थे.

निपाह वायरस से संक्रमण के लक्षणों को कैसे पहचाने? | How To Recognize The Symptoms of Nipah Virus Infection

विशेषज्ञों का मानना है कि निपाह वायरस हवा के माध्यम से फैलने वाला संक्रमण है, जो संक्रमित शरीर के सीधे संपर्क में आने वाले लोगों को प्रभावित करता है. इस वायरस के लक्षण संक्रमण के 3-14 दिनों के भीतर दिखाई देना शुरू हो जाते है. निपाह वायरस से संक्रमण के कुछ सामान्य लक्षण है, सरदर्द, बुखार, जी मिचलाना, चक्कर आना, सुस्ती और मानसिक विकार, जैसे भ्रम की स्थिति होना. यह लक्षण 7-10 दिनों तक रह सकते है.
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वायरस से संक्रमण के कारण मस्तिष्क में सूजन और तेज बुखार होता है, जिसके कारण भ्रम की स्थिति और लगातार नींद आने जैसी स्थिति पैदा होती है. अगर लक्षणों की अनदेखी की जाये, तो 24-48 घंटों के अंदर व्यक्ति कोमा में जा सकता है. कुछ मरीजों में मस्तिष्क या श्वसन से सम्बंधित अन्य लक्षण देखे जा सकते है. इसलिए किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें.

निपाह वायरस से संक्रमण का खतरा किसे है? | Who Is At Risk Of Infection With Nipah Virus

अस्पतालों में काम करने वाले और संक्रमित व्यक्तियों की देखभाल करने वाले लोगों को वायरस से संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा होता है. मलेशिया और सिंगापोर में निपाह वायरस का संक्रमण उन लोगों में देखा गया, जो संक्रमित सूअरों के अत्यधिक संपर्क में रहते थे. बांग्लादेश और भारत में खजूर का रस (ताड़ी) का सेवन और चमगादड़ों के संपर्क में आने को इसके लिए जिम्मेदार माना गया.
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निपाह वायरस के इन्फेक्शन से कैसे बचें? | How To Avoid Nipah Virus Infection

प्रभावित क्षेत्र में बीमार सूअरों और चमगादड़ों के संपर्क में आने से बचाव करके वायरस के संक्रमण से बचा जा सकता है. चमगादड़ों के शारीरिक स्त्राव से दूषित खजूर के रस (ताड़ी) का सेवन करने से बचना चाहिए. चमगादड़ों द्वारा आंशिक रूप से खाये गए फलों का सेवन न करें और चमगादड़ों द्वारा दूषित किये गए कुओं के जल का सेवन नहीं करना चाहिए. ऐसा माना जाता है कि चमगादड़ खुले बर्तनों में इकठ्ठा किये गए ताड़ी को पीते है, जिसके दौरान वह कभी कभी उसमे मूत्र विसर्जन के द्वारा वायरस से दूषित कर देते है. इसलिए भविष्य में संक्रमण को रोकने के लिए निगरानी और जागरूकता महत्वपूर्ण है.

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संक्रमण की स्थिति में बीमारी के लक्षणों और अन्य मनुष्यों में संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए अस्पतालों द्वारा जागरूकता लायी जानी चाहिए. वायरस से संक्रमण का अंदेशा होने पर पूरी जांच करवाई जानी चाहिए. संक्रमित व्यक्तियों का इलाज कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों को पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए, जैसे कि मास्क और दस्तानों का उपयोग करना.

क्या निपाह वायरस से संक्रमित व्यक्ति का इलाज संभव है? | Is It Possible To Treat A Person Infected With Nipah Virus

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वर्तमान में निपाह वायरस के संक्रमण का कोई प्रभावी उपचार उपलब्ध नहीं है. ऐसी स्थिति में केवल लक्षणों के आधार पर ही प्राथमिक उपचार किया जाता है. संक्रमण को रोकने के मानक तरीकों का इस्तेमाल करके उसे अन्य इंसानों में फैलने से रोकना अत्यंत महत्वपूर्ण है. निपाह वायरस से संक्रमण के सभी संदिग्ध मामलों को पृथक करके अत्यंत गहन निगरानी में रखा जाना चाहिए. रिबावीरिन नामक औषधि इस वायरस के लिए कृत्रिम परिवेश में प्रभावी साबित हुई है, लेकिन अभी तक इंसानों के अंदर इसका उपयोग प्रभावी साबित नहीं हुआ है.

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