स्वास्थ्य बीमा क्या है? और क्या है इसके फायदे, बीमा कराते समय किन बातों का ध्यान रखें | What is Health Insurance in Hindi

स्वास्थ्य बीमा क्या है? उसके फायदे, ध्यान रखने योग्य बातें | What is Health Insurance in Hindi | How to Get Health Insurance

विश्वभर में हो रहे रोग और हर रोज आती नई-नई बीमारियों को देखते हुए लोगो में अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ रही है. अब लोग योगा और व्यायाम की तरफ आकर्षित हो रहे है. अपने खान-पान का ध्यान रखना भी जरुरी हो गया है. लेकिन सोचिये यदि आपके इन सभी चीजो को ध्यान में रखते हुए भी आपको कोई बड़ी बीमारी हो जाये तब आप क्या करेंगे ?
What is Health Insurance in Hindi
शायद आपका जवाब होगा “उस बीमारी का इलाज” पर क्या आप जानते है इस महंगाई के ज़माने में किसी छोटी से छोटी बीमारी को ठीक करने में कितना खर्च हो जाता है? आप माने या माने पर यदि आप एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते है और भगवान ना करे आपके परिवार में किसी को कोई बड़ी बीमारी हो जाती है तो आपको बता दे उसमे आने वाला खर्च आपको पुरे 10 साल पीछे धकेल सकता है.

हमारा मतलब है आपके जीवन के पिछले 10 सालो में की गयी जितनी भी बचत होगी, वो सब उस बीमारी में खर्च हो सकती है. तब एक सवाल और आता है कि “क्या हम कभी इन बीमारियों के डर से बाहर निकल पाएँगे”?

अब बात करते है उन लोगो की जो मानते है की उन्हें कभी कोई बड़ी बीमारी नहीं हो सकती. चलिए मान लेते है आपको कोई बीमारी नहीं हो सकती! पर क्या आप निश्चित तौर पर ये कह सकते है कि आपके साथ कभी कोई दुर्घटना भी नहीं हो सकती. जी हाँ, दोस्तों यदि भविष्य में आपके साथ कोई दुर्घटना हो जाती है और डॉक्टर आपकी सर्जरी या कुछ और करने की बात करता है जिसमें आपके लाखो रुपये खर्च हो सकते है, तब आप क्या करेंगे?

आपके सभी सवालों का जवाब है “HEALTH INSURANCE”, जी हाँ दोस्तों स्वास्थ्य बीमा इन सभी परेशानियों का वो हल है जिससे आपकी सारी चिंता खत्म हो सकती है वो कैसे? ये हम आपको बताते है. पहले जान ले स्वास्थ्य बीमा होता क्या है? और ये कैसे काम करता है.
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स्वास्थ्य बीमा क्या होता है? | What is Health Insurance in hindi?

यदि आज आप बाज़ार में बीमा कराने के लिए निकलेंगे तो आपके सामने कई तरह के बीमा पॉलिसी सामने आएगी. जैसे आप अपनी गाड़ी का या जीवन का बीमा करवाते है. बस उसी तरह आपके स्वास्थ्य का भी बीमा किया जाता है. जैसे बीमा कंपनी आपकी गाड़ी में किसी तरह का नुकसान होने पर उसका खर्च उठाती है, उसी तरह स्वास्थ्य बीमा में बीमा कंपनी आपकी हेल्थ पर आने वाले खर्च का ख्याल रखती है.

यदि और आसान शब्दों में कहे तो “स्वास्थ्य बीमा एक ऐसी पद्दति है जो आपके स्वास्थ्य बिगड़ने पर आपकी आर्थिक सहायता करती है. या फिर यूँ कहे कि “स्वास्थ्य बीमा” बीमा कंपनी की वो सेवा होती है जो आपके स्वास्थ्य सबंधी होने वाले खर्च को उठाती है. आपको सिर्फ इस सेवा को बीमा कंपनी से खरीदना होता है.

स्वास्थ्य बीमा कैसे किया जाता है ? | How to Get Health Insurance

भारत में आज भी 70% से ज्यादा लोगो ने अपना स्वास्थ्य बीमा नहीं कराया है, और जिन्होंने कराया है उनमे भी कई लोगो को स्वास्थ्य बीमा की सही पॉलिसी के बारे में जानकारी नहीं है. चूँकि ये सेवाएं हमारे स्वास्थ्य से सम्बंधित होती है इसलिए ये जरुरी हो जाता है कि हम सही और पूरी जानकारी के साथ पॉलिसी ख़रीदे.

  • आप पॉलिसी दो तरीके से खरीद सकते है पहला ऑनलाइन और दूसरा ऑफलाइन दोनों तरीको से आप अपना स्वास्थ्य बीमा करा सकते है. इन्टरनेट पर ऐसी ढेरो कंपनी है जो आपका Health Insurance करती है लेकिन सही पॉलिसी जानने के लिए Policy Bazaar जैसी वेबसाइट से आप तुलना कर सकते है.
  • ऑफलाइन, यानि आप किसी भी Health Insurance कंपनी के एजेंट से मिलकर और सही जानकारी लेकर भी अपना स्वास्थ्य बीमा करा सकते है, पर ध्यान रहे कोई भी कंपनी आपके फायदे के लिए कम और अपने फायदे के लिए ज्यादा काम करती है इसलिए पॉलिसी लेते समय उसके सारे नियम और शर्ते ठीक से समझ ले ताकि बाद में क्लैम करते समय आपको परेशानी न उठानी पढ़े.
  • दोस्तों पॉलिसी लेने के बाद हम सोच बैठते है कि अब हमारी सभी बीमारियों का खर्चा बीमा कंपनी उठाएगी. पर आपको बता दे ऐसा बिलकुल नहीं होता. बीमा कंपनी आपकी लागत का कुछ प्रतिशत हिस्सा ही आपको देती है ये आपकी पॉलिसी पर निर्भर करता है कि वो कितने प्रतिशत आपकी मदद करेगी.

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स्वास्थ्य बीमा के प्रकार | Types of Health Insurance

स्वास्थ्य बीमा कई प्रकार के होते है, ये बीमा कंपनी उपभोक्ता की सहूलियत से उसे प्रदान करती है. जिसमे कुछ प्रकार हमने निचे बताएं है.
किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य बीमा योजना दूसरी योजना की तुलना में बेहतर नहीं है. यह वास्तव में आपकी जरूरतों और प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है. कुछ लोग शुल्क-सेवा योजनाओं द्वारा प्रदान की जाने वाली स्वत्व अधिकार का आनंद लेते हैं, जबकि अन्य कम लागत वाले बंद-पैनल एचएमओ को पसंद करते हैं. साथ ही, हर स्वास्थ्य बीमा कंपनियां व्यवसाय के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं, इसलिए योजनाओं के प्रकारों के बीच भेद करना मुश्किल हो जाता है.

फिर भी हमने स्वास्थ्य बीमा को परंपरागत और प्रतिबंधित देखभाल के हिसाब से 4 प्लान्स में बांटा है.

  1. शुल्क-सेवा योजना(fee for Service plan)
  2. PPO( Preferred Provider Organizations)
  3. POS( Point-Of-Service plans)
  4. HMOs( Health Maintenance Organizations)

1. शुल्क-सेवा योजना(fee for Service plan) :-

इस योजना में आपको पहले बीमारी में हुआ खर्च चुकाना पड़ता है उसके बाद बीमा कंपनी उस बिल का अधिक से अधिक प्रतिशत हिस्सा आपको चुकाती है. पिछले कुछ सालो पहले ये योजना एक आदर्श योजना हुआ करती थी. जिसमे आप स्वतंत्र रूप से अपना डॉक्टर, अस्पताल और स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने वाला चुन सकते थे.

  • आप अपने इलाज के लिए बिना किसी की परमिशन के अपना स्पेशलिस्ट चुन सकते हो, जहाँ चाहे वहाँ अपना इलाज करा सकते हो. आपको इस योजना में बीमा कंपनी से बाध्य नहीं रहना होता.
  • जीतनी अच्छी इस योजना की सेवा है उतनी ही महँगी इसकी शुल्क होती है. आमतौर पर बीमा कंपनी भुगतान शुरू होने से पहले 13000 से 1,75,000 के बीच वेतन शुरू कर देती है. इसमें आपको पहले अस्पताल का बिल चुकाना होता है उसके बाद बीमा कंपनी आपके अस्पताल के बिल को देखते हुए बिल का 80% हिस्सा आपको चूका देती है, कई बार बीमा कंपनी सीधा अस्पताल को ही पैसा चूका देती है.
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  • शुल्क-सेवा योजना के तहत उपभोक्ता को बीमा कंपनी वही पैसा लौटाती है जो अस्पताल में जाने और इलाज कराने में आता है. यदि आपका डॉक्टर बीमा कंपनी की योजना की सीमा के हिसाब से ज्यादा भुगतान करवाता है तो शेष रकम आपको ही भरना पड़ेगी.
  • शुल्क सेवा को लेते वक्त बीमा कंपनी को जितना ज्यादा प्रीमियम उपभोक्ता देता है उतनी सेवाएं उन्हें मिलती है. ये सेवा महँगी तो है ही बल्कि इसमें कागजी काम भी बहुत होता है.

2.Preferred Provider Organizations (PPOs) :-

PPO उपभोक्ताओ के लिए वो सेवा है जो कम शुल्क और स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं के नेटवर्क के साथ आती है. अर्थात इस सेवा के तहत उपभोक्ता को एक सिमित दायरे में बाध्य होकर इलाज कराना होता है. ये दायरा बीमा कंपनी चुनती है”.

  • उदाहरण के लिए आप अपना इलाज बीमा कंपनी के चुने गये दायरे में करवाते है और आपको कुछ 10,000 रुपये अस्पताल में चुकाने पड़ते है तब इस परिस्थिति में बीमा कंपनी आपको पूरा पैसा चुकाएगी जितना आपका खर्च हुआ है. लेकिन यदि आप चुने गये दायरे के बाहर जाकर अपना इलाज करवाते है तो बीमा कंपनी अपने भुगतान में कुछ प्रतिशत कटोती कर सकती है.
  • PPO सेवा में आपको ये आज़ादी होती है कि आप अपने दायरे के हिसाब से किसी भी विशेषज्ञ चिकित्सक से अपना इलाज करा सकते है आपको बीमा कंपनी पूरा पैसा लौटाएगी.
  • PPO सेवा में आपको ना तो ज्यादा कागजी काम करना होता है और ना ही बीमा कंपनी को इस सेवा के लिए ज्यादा रकम चुकानी होती है.

3. POS( Point-Of-Service plans):-

“पॉइंट और सर्विस प्लान भी कुछ हद तक PPO प्लान की तरह ही है. लेकिन इस सेवा में आप अपने दायरे में एक प्राथमिक देखभाल चिकित्सक चुन सकते है. जो आपकी सेहत का ख्याल प्राथमिक रूप से करता है”.

  • आप इस सेवा में भी दायरे के बाहर जाकर अपना इलाज करा सकते है, पर आपको दायरे के बाहर आने वाला ज्यादातर खर्च खुद उठाना होता है.
    यदि आपका प्राथमिक चिकित्सक खुद आपको दायरे के बाहर जाकर इलाज कराने के लिए सलाह देता है तो उस परिस्थिति में इलाज में हुए ज्यादातर खर्च आपको खुद चुकाने होते है.
  • लेकिन आप खुद अपनी इच्छा से दायरे के बाहर जाकर अपना इलाज करवाते है तो आपको ज्यादा खर्च के साथ ज्यादा कागजीकाम से भी गुजरना पड़ता है .
  • POS सेवा आपको दुसरे फायदे भी देती है जैसे आप कोई भी हेल्थ इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम से जुड़ सकते है, जैसे शराब मुक्ति या नशा मुक्ति जैसे सेमिनार आदि.

4. HMOs( Health Maintenance Organizations) :- “जब भी आप हेल्थ मेंटेनेंस आर्गेनाइजेशन सेवा की बात करे तो ध्यान रखे की आप एक क्लोज्ड पैनल सेवा की बात कर रहे है. आपको बता दे ये जितनी कम से कम महँगी होती है उतनी ही लचीली भी होती है. ये सेवा आप व्यक्तिगत तौर पर या परिवार दोनों के लिए ले सकते है”.

  • साफ़ शब्दों में कहे तो इसमें ना ही आपको ज्यादा कागजीकाम करना होता है और न ही ज्यादा प्रीमियम भरना होता है.
  • HMO में सिर्फ ये जरुरी होता है कि पहले आप अपने प्राथमिक चिकित्सक को दिखाएँ, यदि आपका चिकित्सक आपको किसी ओर विशेषज्ञ से परामर्श लेने के लिए कहता है तब आप उस परिस्थिति में अपना इलाज किसी और विशेषज्ञ से करा सकते है.
  • लेकिन आप बिना अपने प्राथमिक चिकित्सक की सलाह किसी और विशेषज्ञ से अपना इलाज कराना चाहते है तो आपको पहले HMO से परमिशन लेना होगी.
  • HMO के खुद के कई क्लिनिक और ऑफिस होते है जो आपको हर तरह की सुविधा प्रदान करते है.

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स्वास्थ्य बीमा के फायदे | Benefits of Health Insurance

वेसे तो स्वास्थ्य बीमा के बहुत सारे फायदे है लेकिन कुछ चुनिन्दा और खास फायदे है जो आपको जरुर जानना चाहिए.

बड़ती ऑनलाइन सुविधाएँ :- पहले जब भी किसी को स्वास्थ्य बीमा लेना होता था तो किसी न किसी एजेंट की मदद से ले पाता था. चूँकि अब इन्टरनेट का ज़माना है और इसलिए बीमा कंपनियों ने ऑनलाइन ही हेल्थ इन्स्युरेंस करना शुरू कर दिया है. अब आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं. न ही किसी एजेंट से मिलने की जरूरत है, अब आप ऑनलाइन अपना स्वास्थ्य बीमा करा सकते है.

रेनुअल सुविधा :- जैसा की हमने बताया, पहले और अभी की बीमा पॉलिसी में काफी बदलाव आये है और ये पहले से काफी सरल और लचीली है. यानि पहले बीमा की आयु आपकी अधिकतम आयु तक सीमित होती थी. लेकिन अब आप किसी भी उम्र में बीमे का रेनुअल करा सकते हो.

अस्पताल और बीमा कंपनी में सीधा कनेक्शन :- पहले की बीमा शर्ते कुछ ऐसी थी जिसमे आपको अस्पताल को पहले रकम चुकानी होती थी उसके 24 घंटे बाद बीमा कंपनी आपकी सहायता करती थी. लेकिन अब कुछ बीमा कंपनी ऐसी है जो सीधे अस्पताल से जुड़कर आपकी सहायता उसी वक्त कर देती है.

स्वास्थ्य बीमा से सम्बंधित जानने योग्य बातें | Health Insurance Facts in Hindi

अक्सर स्वास्थ्य बीमा लेते वक्त कुछ बातों का ध्यान नहीं रखते जिसके चलते हमें बाद में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है, कोई भी बीमा कंपनी अपने फायदे के लिए ही काम करती है इसलिए एजेंट अपने फायदे के हिसाब से आपको योजना के बारे में बताता है. स्वाथ्य बीमा लेते वक्त कुछ खास बातों का ध्यान बहुत जरूरी है जैसे ..

  • बीमा लेते समय आपको पूरी जानकारी होना चाहिए की होस्पिटलायिजेशन के सम्बंधित किन सुविधाओं को आपकी पॉलिसी में सम्मलित किया गया है.
  • उपभोक्ता का यह जानना जरुरी है कि इलाज के वक्त जिन खर्चो का सामना मरीज को करना होता है उनमें किन-किन चीजो को पॉलिसी में कवर किया है.
  • किसी भी हेल्थ सम्बंधित पॉलिसी में उपभोक्ता को पॉलिसी कवरेज के सारे नियम व शर्ते जानना बहुत जरुरी है.
  • उपभोक्ता को बीमा खरीदते समय इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि जो बीमा पॉलिसी वो खरीद रहा है उसका को- इन्स्युरेंस है या नहीं. और साथ ही बीमा का कब-कब रेनुअल कराना है उसकी तारीख का भी ख्याल रखना होता है .

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